एक सुबह जब मैं आईने के सामने बाल बना रहा था
तो मुझे लगा आईने के अंदर कुछ हिला
गौर से देखने जब करीब जाके आईने को हाँथ लगाया
तो लगा जैसे आइना ठोस नहीं बल्कि दलदली है
फिर अचानक आईने में से दो हाँथ बाहर निकले और मुझे अंदर खींचने लगे
बड़े मजबूत हाथ थे वो
बड़ी जद्दोजहत करनी पड़ी खुद को छुडाने में
कितना वक़्त लगा, बताना मुश्किल है
पर जब मैंने फिर आइना देखा,
तो मेरे बाल सफ़ेद हो गए थे और चेहरे पे एक हज़ार झुर्रियां पड़ी थी
मैंने घबरा के आईने से चीख के पूछा
"यह क्या कर दिया तुमने"
आइना बोला "मैंने क्या किया?!!,
वक़्त का हिसाब तो तुमने नहीं रखा,
आईने में वो शख्स तुम ही तो थे
खुद से ही तो उलझे रहे इतने सालों "॥
तो मुझे लगा आईने के अंदर कुछ हिला
गौर से देखने जब करीब जाके आईने को हाँथ लगाया
तो लगा जैसे आइना ठोस नहीं बल्कि दलदली है
फिर अचानक आईने में से दो हाँथ बाहर निकले और मुझे अंदर खींचने लगे
बड़े मजबूत हाथ थे वो
बड़ी जद्दोजहत करनी पड़ी खुद को छुडाने में
कितना वक़्त लगा, बताना मुश्किल है
पर जब मैंने फिर आइना देखा,
तो मेरे बाल सफ़ेद हो गए थे और चेहरे पे एक हज़ार झुर्रियां पड़ी थी
मैंने घबरा के आईने से चीख के पूछा
"यह क्या कर दिया तुमने"
आइना बोला "मैंने क्या किया?!!,
वक़्त का हिसाब तो तुमने नहीं रखा,
आईने में वो शख्स तुम ही तो थे
खुद से ही तो उलझे रहे इतने सालों "॥
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