Tuesday, June 4, 2013

वक़्त चोर

एक सुबह जब मैं आईने के सामने बाल बना रहा था
तो मुझे लगा आईने के अंदर कुछ हिला

 गौर से देखने जब करीब जाके आईने को हाँथ लगाया
तो लगा जैसे आइना ठोस  नहीं बल्कि दलदली है

फिर अचानक आईने में से दो हाँथ बाहर  निकले और मुझे अंदर खींचने लगे
बड़े मजबूत हाथ थे वो
बड़ी जद्दोजहत करनी पड़ी खुद को छुडाने में

कितना वक़्त लगा, बताना मुश्किल  है
पर जब मैंने फिर आइना देखा,
तो मेरे बाल सफ़ेद हो गए थे और चेहरे पे एक हज़ार झुर्रियां पड़ी थी

मैंने घबरा के आईने से चीख के पूछा
"यह क्या कर दिया तुमने"

आइना बोला  "मैंने क्या किया?!!,
वक़्त का हिसाब तो तुमने नहीं रखा,
आईने में  वो शख्स  तुम ही तो  थे
खुद से ही तो उलझे रहे इतने सालों "॥

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