किनारे पे खड़े तुम्हे देखते ही,
खुशी से मेरी श़क्ल बनने लगी ।
तेज़ी से दौड़ता हुआ
तुम्हारी तरफ चल पड़ा ।
और जब तुमसे टकराया
तो सब टूट गया
मेरे दुःख,
मेरे दर्द,
मेरी परेशानी,
मेरा बीता हुआ कल,
मेरा आने वाला कल ।
बचा केवल पानी, खामोश पानी ।
जाते जाते धीरे से तुम्हे गले लगाया,
फिर हलके से तुम्हारा माथा चूमा,
और अलविदा कह के गुम हो गया समंदर में ।
बस इतनी सी थी मेरी ज़िन्दगी ।
कई बार सोचा
अगर में वहीँ रुक जाता तो ??
कुछ और जी जाता तो ??
फिर सोचा
ऐसा होता तो वहां मैं, मैं नहीं होता
जो होता सच नहीं होता
और देखो, मेरा सच तो वोही है
मेरी हद
मेरी सीमा
मेरा किनारा।
किस्से कहानियों में नहीं मिलेगी,
कभी खोजनी हो मेरी ज़िन्दगी
तो उन्ही किनारों में ढूँढना ।
उन किनारों के पथ्थरों पे पड़े आड़े तिरछे निशानों पे
जिन्हें मैंने छुआ था कभी
जब मैं जिया था
जब मैं लहर था ।।
खुशी से मेरी श़क्ल बनने लगी ।
तेज़ी से दौड़ता हुआ
तुम्हारी तरफ चल पड़ा ।
और जब तुमसे टकराया
तो सब टूट गया
मेरे दुःख,
मेरे दर्द,
मेरी परेशानी,
मेरा बीता हुआ कल,
मेरा आने वाला कल ।
बचा केवल पानी, खामोश पानी ।
जाते जाते धीरे से तुम्हे गले लगाया,
फिर हलके से तुम्हारा माथा चूमा,
और अलविदा कह के गुम हो गया समंदर में ।
बस इतनी सी थी मेरी ज़िन्दगी ।
कई बार सोचा
अगर में वहीँ रुक जाता तो ??
कुछ और जी जाता तो ??
फिर सोचा
ऐसा होता तो वहां मैं, मैं नहीं होता
जो होता सच नहीं होता
और देखो, मेरा सच तो वोही है
मेरी हद
मेरी सीमा
मेरा किनारा।
किस्से कहानियों में नहीं मिलेगी,
कभी खोजनी हो मेरी ज़िन्दगी
तो उन्ही किनारों में ढूँढना ।
उन किनारों के पथ्थरों पे पड़े आड़े तिरछे निशानों पे
जिन्हें मैंने छुआ था कभी
जब मैं जिया था
जब मैं लहर था ।।