वहां सब मिलता है माँ
मैंने झुंझलाते हुए कहा ,
और ऊपर से मेरे कपड़ो से भी अचार की बदबू आने लगेगी |
बदबू !!!! ?!! मैंने देख तेरे लिए कितने प्यार से बनाया है,
लेजा न प्लीज , माँ ऐसे गिडगिडाके बोली जैसे मैं एहसान करूँगा आम का अचार साथ ले जा के |
हमेशा ऐसा ही करती थी वो
कभी नहीं सुनती थी मेरी
यह ले जाओ, वो ले जाओ
चुपके से बिना पूछे कभी कभी बैग में कभी कंगी , कभी बोरोप्लस रख देती थी
कुछ बात नहीं मानती थी मेरी
जबकि हमेशा समझाता था मैं उसे की वहां सब मिलता है।
आज रेल गाडी का वक़्त हो रहा है मेरी
आज लग रहा था की कोई जबरजस्ती बैग में कुछ रख दे तो अपनापन सा लगे
कोई तो कंघी, रुमाल , झंडू बाम रख दे , या वही आम का आचार ,
हाँ तो आने दो न कपड़ो से आचार की खुशबू |
पर आज नहीं था आम का आचार
मैंने आखिरी बार खाली किचन को देखा और स्टेशन की तरफ चल दिया
सच तो है वहां सब मिलता है, पर अब तुम कहीं नहीं मिलोगी माँ ||
मैंने झुंझलाते हुए कहा ,
और ऊपर से मेरे कपड़ो से भी अचार की बदबू आने लगेगी |
बदबू !!!! ?!! मैंने देख तेरे लिए कितने प्यार से बनाया है,
लेजा न प्लीज , माँ ऐसे गिडगिडाके बोली जैसे मैं एहसान करूँगा आम का अचार साथ ले जा के |
हमेशा ऐसा ही करती थी वो
कभी नहीं सुनती थी मेरी
यह ले जाओ, वो ले जाओ
चुपके से बिना पूछे कभी कभी बैग में कभी कंगी , कभी बोरोप्लस रख देती थी
कुछ बात नहीं मानती थी मेरी
जबकि हमेशा समझाता था मैं उसे की वहां सब मिलता है।
आज रेल गाडी का वक़्त हो रहा है मेरी
आज लग रहा था की कोई जबरजस्ती बैग में कुछ रख दे तो अपनापन सा लगे
कोई तो कंघी, रुमाल , झंडू बाम रख दे , या वही आम का आचार ,
हाँ तो आने दो न कपड़ो से आचार की खुशबू |
पर आज नहीं था आम का आचार
मैंने आखिरी बार खाली किचन को देखा और स्टेशन की तरफ चल दिया
सच तो है वहां सब मिलता है, पर अब तुम कहीं नहीं मिलोगी माँ ||