Wednesday, April 17, 2013

खालीपन










इस्त्री की हुए तुम्हारी पोशाकें ,
ज्यों का त्यों अलमारी में रखी हुई हैं ।
हाँथ लगाने से डर  लगता है,
कहीं तह के  साथ तुम्हारी याद भी न टूट जाये ।

वो तुम्हारे महंगे जूते, जो हमें बहुत पसंद थे
एक दो बार पोशीदा भी रखे
पर तुमने उसे ढूँढ निकाला
आज भी कीचड़ से सने उस कोने में रखे हैं
जैसा की तुमने पहन के रख छोड़े थे आखिरी दिन ।

वो कहते हैं अब तुम रिहा हो  सबसे
मुझे भी रिहा कर दो मेरे भाई
तुम्हारे रूमाल से, तुम्हारे मोबाइल से
तुमसे जुडी तुम्हारी सारी  चीज़ों से
उन  गानों से जो हमने साथ में  सुने  थे
उन फिल्मों से जो हमने साथ में देखी थी
वो सारी  जगहों से जहाँ हम साथ जीये थे

घर बदल दूं , तुम्हारी चीजें दरिया में बहा दूँ
पर तुम्हारा हिस्सा  जो मुझसे जुदा है, उसका क्या
या चलो एक खेल खेलते हैं
मैं गिनती गिनता हूँ, सोचूंगा तुम छुपे हो
और कभी गिनती गिनना  कभी बंद नहीं करूँगा ॥