बड़ी सी एक ईमारत
कुछ नाराज़ सी
कुछ उदास सी
कुछ खुश सी
कुछ उदास सी
दूसरी इमारतों की तरह उसमे लोग नहीं रहते थे
बस कुछ चीज़ें थी, पुरानी सी।
जैसे एक टुटा हुआ मोतियों वाला गुलाबी कंगन
जिसके पीछे पता नहीं कितनी कसमों ने दम तोडा
पता नहीं कितने दिल टूटे
और पता नहीं कितने लोग फिर मिटटी में मिल गए
आज पांच सौ साल बाद यहाँ एक चबूतरे के ऊपर पड़ा है
अजीब सी कहानी है उस हाँथ के कंगन की
चबूतरे के ऊपर लिखा है की कंगन को हाँथ लगाना मना है।
एक हिरन के चमड़े से बना एक बस्ता
जिसे किसी ने महीने भर की मजदूरी से ख़रीदा था
अपनी छोटी सी उम्र में बड़े प्यार से रखा था वो बस्ता
फिर एक रात एक सराय में किसी ने उसका गला दबा के वो बस्ता चुरा लिया
वहां से एक हाँथ से दूसरे उस बस्ते का सफ़र शुरू हुआ
अब छ सौ साल की उम्र में यहाँ आराम कर रहा है
बस्ता खोलोगे तो ठूंस ठूंस के भरी हुई ढेर सारी कहानियां बाहर निकल पड़ेंगी
अगर खोल पाये तो क्योंकि बस्ते को भी हाँथ लगाना मना है।
एक छोटी सी पथ्थर की स्लेट है
उसके बाबा ने मेले से खरीदी थी उसके लिए 700 साल पहले
उसकी नन्ही नन्ही उँगलियों ने बहुत कुछ लिखा था उस पे
अपना नाम, बाबा का नाम, अम्मा का नाम, गांव का नाम
वो नन्ही उँगलियाँ धीरे धीरे बड़ी हुई, फिर बूढी और फिर एक दिन गायब हो गयी
उस स्लेट पे अब कोई नहीं लिखता
ना उसके गांव का नाम, ना अम्मा का नाम, ना बाबा का नाम और ना ही उसका नाम
उस स्लेट को सुघोंगे तो आज भी उसके गिरे हुए कैरी के आचार की खुश्बू आएगी
उसे हाँथ लगाओगे तो शायद सदियों पहले जिए उस मासूम की छुवन महसूस होगी
अगर छु सके तो क्योंकि उस स्लेट को छूना मना है
और भी है कई सारी छोटी बड़ी सायानी चीजें
सब एक से एक कहानियां लिए हुए
एक किताब सी है वो,सबकी कहानियां समेटे हुए
भले ही लोग उसे ईमारत कहे भले ही लोग उसे Museum कहे।।
कुछ नाराज़ सी
कुछ उदास सी
कुछ खुश सी
कुछ उदास सी
दूसरी इमारतों की तरह उसमे लोग नहीं रहते थे
बस कुछ चीज़ें थी, पुरानी सी।
जैसे एक टुटा हुआ मोतियों वाला गुलाबी कंगन
जिसके पीछे पता नहीं कितनी कसमों ने दम तोडा
पता नहीं कितने दिल टूटे
और पता नहीं कितने लोग फिर मिटटी में मिल गए
आज पांच सौ साल बाद यहाँ एक चबूतरे के ऊपर पड़ा है
अजीब सी कहानी है उस हाँथ के कंगन की
चबूतरे के ऊपर लिखा है की कंगन को हाँथ लगाना मना है।
एक हिरन के चमड़े से बना एक बस्ता
जिसे किसी ने महीने भर की मजदूरी से ख़रीदा था
अपनी छोटी सी उम्र में बड़े प्यार से रखा था वो बस्ता
फिर एक रात एक सराय में किसी ने उसका गला दबा के वो बस्ता चुरा लिया
वहां से एक हाँथ से दूसरे उस बस्ते का सफ़र शुरू हुआ
अब छ सौ साल की उम्र में यहाँ आराम कर रहा है
बस्ता खोलोगे तो ठूंस ठूंस के भरी हुई ढेर सारी कहानियां बाहर निकल पड़ेंगी
अगर खोल पाये तो क्योंकि बस्ते को भी हाँथ लगाना मना है।
एक छोटी सी पथ्थर की स्लेट है
उसके बाबा ने मेले से खरीदी थी उसके लिए 700 साल पहले
उसकी नन्ही नन्ही उँगलियों ने बहुत कुछ लिखा था उस पे
अपना नाम, बाबा का नाम, अम्मा का नाम, गांव का नाम
वो नन्ही उँगलियाँ धीरे धीरे बड़ी हुई, फिर बूढी और फिर एक दिन गायब हो गयी
उस स्लेट पे अब कोई नहीं लिखता
ना उसके गांव का नाम, ना अम्मा का नाम, ना बाबा का नाम और ना ही उसका नाम
उस स्लेट को सुघोंगे तो आज भी उसके गिरे हुए कैरी के आचार की खुश्बू आएगी
उसे हाँथ लगाओगे तो शायद सदियों पहले जिए उस मासूम की छुवन महसूस होगी
अगर छु सके तो क्योंकि उस स्लेट को छूना मना है
और भी है कई सारी छोटी बड़ी सायानी चीजें
सब एक से एक कहानियां लिए हुए
एक किताब सी है वो,सबकी कहानियां समेटे हुए
भले ही लोग उसे ईमारत कहे भले ही लोग उसे Museum कहे।।
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