Tuesday, June 17, 2014

छम छम वाली बारिश

काम करते-करते अचानक नज़र खिड़की पे गयी
काले बादल, बिजलियों की रोशनी और बारिश हो रही थी
छम छम वाली बारिश

हलाकि AC के कारण खिडकियों पे पुख्ता कांच थे, पर बिना आवाज़ सुने ही पहचान जाता हूँ इसे
छम छम वाली बारिश

साठ के दशक के सिनेमा में कभी जब हीरो पार्टी में गाना गाता था, तो एक एक्स्ट्रा हुआ करती थी उस गाने में,
जो बिना सुर ताल अपनी ही धुन में नाचती थी।
जैसे उसे अपना सारा हुनर एक ही गाने में दिखा के लोगों से लोहा मनवाना है।
कुछ वैसी ही होती है छम छम वाली बारिश,
बिलकुल Show Off
पर जैसी भी हो, होती बड़ी मजेदार है
एक ही झटके में सब हरा सा हो जाता है,
सड़कें तालाब हो जाती है
और जब बारिश खत्म होती है
तो सारे पक्षी बहार गाना गाके जशन सा मनाते है।

थोडा सा मन किया मेरा
टाई को थोडा ढीला कर, चमड़े के जूते में बाहर निकलू और सारे कपडे गीले कर लूँ।
पर सब पागल समझेंगे मुझे।
ऐसा तो बस फिल्मों में ही अच्छा लगता है।
फिर मेरी उम्र भी हो गयी है
यह सोच खुद को रोक लिया।

शाम को घर निकलते वक़्त खिड़की से झाँक के देखा
लगता है फिर होगी छम छम वाली बारिश।
जल्दी से फाइल्स बंद की और तेज़ कदमों से में बाहर चल पड़ा
पीछे से आवाज़ आयी
"सर, छाता भूल के जा रहे हैं आप"
मुस्कुराके, सुना अनसुना करते हुए बाहर आया।
छम छम वाली बारिश बस शुरू होने को ही है।

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