Sunday, November 6, 2011

इन्द्रधनुष

फिर निकला है वो इन्द्रधनुष
थोड़ी सी देर के लिए....... |

जब भी आसमान उदास होता है,
या फिर हवा की आँखों में
नमी होती है,
तो उसे सम्हालने चला आता है |
उस दिन कहने लगा
 "देखो
 कितने सारे रंग है फिर उदास क्यूँ हो
हरा नहीं चाहिए, तो नीला ले हो
लाल नहीं चाहिए, तो पीला ले लो
अगर और भी रंग चाहिए, तो मेरे सात रंगों
को जोड़ तोड़ के नए रंग बना लो"

" और अगर फिर भी दिल न माने
तो मेरे ऊपर  फिसलनी की तरह फिसल जाना
रंगों के लिए तो बहुत फिसले होगे
आज रंगों के ऊपर फिसल के देखो  |
बड़ा मज़ा आएगा,
और तुम जहाँ कहोगे वहां में तुम्हे छोड़ भी दूंगा "

"हाँ.... एक बात और भी है
यह रंग  थोड़े से कच्चे हैं मेरे,
पर मैं तो आता जाता रहता हूँ
फिर दे जाऊंगा, नए रंग तुम्हे
पर  अबकी बार मुझे बुलाने की लिए रोना मत
 सुना है दिल से हंसने से भी आँखें गीली होती हैं "

2 comments:

  1. mast yaar..mera galib dost vapas apne rang main lout aaya ....lage raho

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  2. Really good...well said...so soothing

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