हर बार जब भी कभी सपने में मिलते हो
तो मैं तुम्हे चिकोटी काट के देखता हूँ की कहीं यह सपना तो नहीं है
पता नहीं कितनी बार देखा है एक ही सपना
अब तो तुम्हारी बायीं बांह में चिकोतियों के नीले निशाँ भी साफ़ दीखते हैं
फिर तुम्हे मैं जोर से अपनी बाहों में भर लेता हूँ
सपने में भी तुम्हे लगता होगा कितना पागल हूँ मैं
फिर हम बैठ के ढेर सारी दुनियाजहाँ की बातें करते हैं
पर तुम बार बार आसमान की तरह देखती हो
जब मैं कहता हूँ की शाम होने में वक़्त है
तो तुम कहती हो की, बुद्धू दिन होने को है
सुबह जब नींद टूटती है तो नजदीकियों का एहसास फासलों में बदल जाता है
और कुछ फासले मीलों में नहीं नपते, उनका पैमाना तो वक़्त भी नहीं हो सकता
अब मौत को कोसूं, की ज़िन्दगी से शिकायत करूँ
एक बार तुम्हे मौत ने जलाया और एक बार मुझे ज़िन्दगी खा गयी
तो मैं तुम्हे चिकोटी काट के देखता हूँ की कहीं यह सपना तो नहीं है
पता नहीं कितनी बार देखा है एक ही सपना
अब तो तुम्हारी बायीं बांह में चिकोतियों के नीले निशाँ भी साफ़ दीखते हैं
फिर तुम्हे मैं जोर से अपनी बाहों में भर लेता हूँ
सपने में भी तुम्हे लगता होगा कितना पागल हूँ मैं
फिर हम बैठ के ढेर सारी दुनियाजहाँ की बातें करते हैं
पर तुम बार बार आसमान की तरह देखती हो
जब मैं कहता हूँ की शाम होने में वक़्त है
तो तुम कहती हो की, बुद्धू दिन होने को है
सुबह जब नींद टूटती है तो नजदीकियों का एहसास फासलों में बदल जाता है
और कुछ फासले मीलों में नहीं नपते, उनका पैमाना तो वक़्त भी नहीं हो सकता
अब मौत को कोसूं, की ज़िन्दगी से शिकायत करूँ
एक बार तुम्हे मौत ने जलाया और एक बार मुझे ज़िन्दगी खा गयी
Heart touching...but depressing too.
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